HYPERLOOP TECHNOLOGY हाइपरलूप टेक्नोलॉजी क्या है पूरी जानकारी

हेलो दोस्तों आज मैं आपको बताऊंगा हाइपरलूप टेक्नोलॉजी क्या है? कैसे काम करती है, और इसे यातायात का पांचवा साधन क्यों कहा जाता है, और कहां कहां इसका प्रोजेक्ट आने वाला है तो सबसे पहले जानिए हाइपरलूप टेक्नोलॉजी क्या है।



HYPERLOOP क्या है?

यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें एक कैप्सूल जैसा कंपार्टमेंट होता है ( जिसे पॉड कहा जाता है ) जो एक वैक्यूम ट्यूब ( जिसे लूप कहा जाता है) के अंदर बहुत ही हाई स्पीड से चलती है। हाइपरलूप  नाम  इसे इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें परिवहन लूप के माध्यम से होता है।

MAGLEV TRAIN या मैग्नेटिक सस्पेंशन ट्रेनों के विकास पर पहले से काम चल रहा है इसमें चुंबक के सहारे ट्रेन पटरी के उपर पर चलती है इससे दोनों के बीच रगड़ कम हो जाती है और रफ्तार बढ़ जाती है ऐसी एक ट्रेन शंघाई से उसकी एयरपोर्ट के बीच 430 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है लेकिन अब इस ट्रेन को चुंबकीय वैक्यूम  ट्यूब के अंदर चलाया जाएगा जिसे HYPERLOOP का नाम दिया गया है ।

HYPERLOOP काम कैसे करती है?

इस हाइपरलूप में दो तरह के टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है।

1. चुम्बकीय निलंबन

चुम्बकीय निलंबन (magnetic levitation ) को आप आसानी से समझ सकते हैं की  गुरुत्वाकर्षण  बल  और अन्य बल को इस तरह से चुंबकीय बल के  बराबर कर देना कि जो चीज जहां है वही रहे ना दाय जाए ना बाए ना ऊपर ना नीचे।

अगर आप साइंस पढे हैं तो आप चुंबक के गुण के बारे में जानते होंगे इसमें दो पोल होते है एक साउथ पोल और एक नार्थ पोल जब दो समान पोल को एक साथ रखते हैं तो दोनों एक दूसरे को धक्का देती है इसी तकनीक को इसमें प्रयोग किया जाता है।

अब होता यह है कि वैक्यूम चेंबर के अंदर पूरा चुंबकीय पटरी बिछाया जाता है और जब इसमें से सामान पोल वाले उस कैप्सूल को पास कराया जाता है तो वह आगे बढ़ती है लेकिन हवा मे ही रहती हैं और घर्षण भी नहीं होती है जिससे स्पीड भी बहुत ज्यादा मिलती है ।







2. एयर प्रेशर

इसमें एक और टेक्नोलॉजी यूज़ होती है जिसे हम एयर प्रेशर कहते हैं जैसा कि एयर हॉकी में होता है।
जो कंपार्टमेंट उस लूप में चलेगी जिसे हम और पॉड कहते हैं उसके पीछे के हिस्से में बैटरी होती है उस उस बैटरी पर चलती है एक कंप्रेसर फैन जो पॉड के आगे के हिस्से में होती है जिससे उस पॉड को ज्यादा थ्रस्ट मिलती है और लो एयर प्रैशर के कारण बहुत अच्छी स्पीड प्राप्त कर लेती है।

चुंबकीय बल और लो एयर प्रेशर के कारण इसका स्पीड औसतन 900किलोमीटर प्रति घंटा और उच्चतम स्पीड 1223 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। हम जानते हैं की साउंड साउंड का स्पीड 1235 किलोमीटर प्रति घंटा होती है तो लगभग लगभग हाइपरलूप की स्पीड कहीं ना कहीं साउंड की स्पीड के बराबर है।







यातायात के पांचवा साधन

अभी तक हमारे बीच यातायात के लिए मात्र चार साधन थे बस गाड़ी,रेल्वे, बोट (पानी जहाज) और हवाई जहाज (एरोप्लेन) वैसे तो स्पेस में जाने के लिए रॉकेट भी है । लेकिन हमारे बीच कोई ऐसी तकनीक नहीं थी जिससे हम धरती पर सोते हुए बहुत ज्यादा स्पीड में एक जगह से दूसरे जगह जा सके और इस चीज को पूरा करने के लिए हमारे बीच आया हाइपरलूप।

यातायात के पांचवा साधन इसे इसलिए कहा जाता है क्योंकि जिन्होंने हाइपरलूप के बारे में सोचा और बताया की यातायात के लिए हमारे बीच एक और साधन हो सकती है और उसका नाम उन्होंने हाइपरलूप रखा।

अब हम यह जानेंगे कि यह तकनीक सबसे पहले इसके ख्याल में आया और किसने सोचा कि हमारे बीच एक और यातायात के साधन हो सकते हैं।


उनका नाम है एलोन मस्क जो एक जाने-माने मिलियनेयर साइंटिस्ट हैं और बहुत बड़े-बड़े कंपनी के मालिक हैं जैसे कि  SpaceX  और  Tesla । इन्ही के कंपनी ने अभी हाल में स्पेस में अपना एक इलेक्ट्रिक कार भेजा है, इलेक्ट्रिक कार की दुनिया में टेस्ला एक बहुत बड़ा नाम हैं।

एलोन मस्क को यातायात के पांचवा साधन के बारे में ख्याल तब आया जब वह ट्रैफिक जाम की वजह से अपने एक मीटिंग में एक घंटे देर से पहुंचे और तब उन्हें लगा की यातायात के लिए एक और साधन होना चाहिए। 2012 में उन्होंने इस चीज को दूसरे कंपनी के सामने प्रस्तावना के रूप में  रखा कि आप इस पर काम करें। एलोन मस्क के पास इतनी समय नहीं थी की वह इस प्रोजेक्ट HYPERLOOP पर काम करें क्योंकि वह अपने स्पेस सैटेलाइट इलेक्ट्रिक कार मैं ज्यादा ध्यान दे रहे थे।


विश्व मे HYPERLOOP

तीन कंपनी जो इस तकनीकी को पूरा करने में लगी हुई है जिनमें से स्पेसएक्स, HTT ( हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी)  और हाइपरलूप वन। 

इसके लिए उन्होंने एक कंपटीशन रखा इसका नाम था हाइपरलूप pod कंपटीशन जिसमें 700 से ज्यादा सहभागी आए लेकिन उनमें से मात्र 120 को चुना गया जिसे स्पेस एक्स स्पॉन्सर करने वाला यह कंपटीशन जनवरी 2016 में आयोजित किया गया था। 




Sir Richard Branson जिनकी कंपनी वर्जिन हाइपरलूप वन हैं। वे लास वेगास से  40 किलोमीटर उत्तर मैं वे अपने 300 काबिल लोगों के साथ जिनमें से 200 इंजीनियर टेस्टिंग कर रहे हैं। जिसके लिए 500 मीटर का एक टेस्टिंग ट्रैक बिछाया गया।



विश्व के कई देश इस प्रणाली को अपनाने के लिए आगे आए हैं अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब जैसे देश ने इसमें रुचि दिखाई है। साथ ही भारत ने भी इसे अपनाने के लिए आगे आया है "हाइपरलूप वन" नामक कंपनी इस परिकल्पना को वास्तविक बनाने का  कर रही है।



भारत में हाइपरलूप तकनीक

2017 के फरवरी महीने में एक सेमिनार आयोजित किया गया था "हाइपरलूप वन कंपनी" के द्वारा जिसमें कई देशों को न्योता दिया गया था लेकिन प्रस्ताव मात्र 90 देश से आए और इसमें भारत भी शामिल था। भारत के पांच कंपनी इसमें अपना इंटरेस्ट दिखाते हुए अपना अपना मार्ग भी तय कर लिया की कौन किस मार्ग पर अपनी 'हाइपरलूप ट्रेन' चलाएंगे।


अभी मुंबई से पुणे के बीच 1 मार्ग हाइपरलूप ट्रेन के लिए बनाने की बात चल रही है बहुत ही जल्द हमारे काम में आएंगे। और हम मुंबई से पुणे 15 से 20 मिनट में पहुंच जाएंगे जिसकी दूरी डेढ़ सौ किलोमीटर है और बस से या ट्रेन से 2 से 3 घंटे लग जाती है।



इस तकनीक के फायदे एवं नुकसान

फायदे


  •  यह तकनीक परिवहन की बहुत तेज गति प्रदान करता    है। जो हवाई जहाज से तेज है और बुलेट ट्रेन के दोगुना है।

  •  इसमे बहुत कम बिजली की खपत है। लूप के ऊपर सोलर प्लेट लगा हुआ रहेगा जिससे पॉड बिजली मिलेगी और बैट्री चार्ज होगा।

  •  यह लंबी दूरी पर कम लागत वाली परिवहन व्यवस्था है।

  • यह खराब मौसम की स्थिति के लिए प्रतिरक्षा है

  •  यह भूकंप के लिए प्रतिरोध है।

  •  यह परिवहन प्रणाली का सुरक्षित मोड है


  • कम लागत में बनने के कारण इससे सफर करने की टिकट सस्ती होगी।

नुकसान

  •  उच्च गति लगभग लगभग ध्वनि की गति से चलने पर यात्रियों को चक्कर भी आ सकती है

  •  इसमें बहुत ही सीमित स्थान होगा जिससे यात्री इधर-उधर नहीं कर सकते हैं।

  •  ट्रैक के लिए स्टील का प्रयोग होता है तापमान के बदलने पर इसका आकार भी बदलता है यह भी एक चिंताजनक बात है।

  • इस तकनीक को लगाने के लिए वृक्षों की काटने की आवश्यकता पड़ सकती है जिससे पर्यावरण को नुकसान है


interesting facts about hyperloop
 हाइपरलूप का यह आइडिया लगभग लगभग 200 साल पुराना है। एक फेमस ब्रिटिश इंजीनियर और इन्वेंटर जॉर्ज मेडट्र ने इस टॉपिक  पर पूरी बुक लिख डाला जो कि सामान को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में मदद करती थी। बाद में इसे अमेरिका में इसका इंप्लीमेंटेशन हुआ जब मैं चलता था स्टीम इंजन के द्वारा 1 साल के बाद यह भी बंद हो गया। 




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